वाल्मीकि रामायण के सुन्दरकाण्ड की संस्कृत PDF मुफ़्त डाउनलोड करें, कथा संक्षेप में पढ़ें और पाठ की विधि जानें।
PDF अपने फ़ोन या कंप्यूटर में सेव करें। एक बार सेव होने के बाद फ़ाइल बिना इंटरनेट के भी खुलती है।
सुन्दरकाण्ड महर्षि वाल्मीकि रचित रामायण का पाँचवाँ काण्ड है। यहाँ इसे सुन्दरकाण्डम् कहा जाता है, और यह संस्कृत श्लोकों में है, जो मूल रामायण की भाषा है। इसी कथा को तुलसीदास जी ने बाद में अवधी में रामचरितमानस में भी लिखा, इसलिए हिंदी भाषी परिवारों में “सुंदरकांड पाठ” कहते ही अक्सर तुलसीदास जी के ग्रंथ की बात होती है। इस पेज पर मूल संस्कृत ग्रंथ की बात है।
कथा वही है: हनुमान जी सीता माता की खोज में समुद्र पार करके लंका पहुँचते हैं, अशोक वाटिका में उनसे भेंट करते हैं, लंका दहन करते हैं और श्रीराम को समाचार देकर लौटते हैं। पर वाल्मीकि रामायण की भाषा और शैली तुलसीदास जी के ग्रंथ से अलग है, और इसमें कथा का विस्तार भी कुछ अलग है।
वाल्मीकि रामायण में सुन्दरकाण्ड लगभग 68 सर्गों (अध्यायों) में विभाजित है, और हज़ारों श्लोकों से बना है। यह संख्या तुलसीदास जी के सुंदरकांड से कहीं अधिक बड़ी है, क्योंकि वाल्मीकि रामायण मूल महाकाव्य है और इसमें घटनाओं का विस्तार से वर्णन है।
अगर आप संस्कृत पढ़ सकते हैं, या मूल श्लोकों के साथ पाठ करना चाहते हैं, तो यह PDF आपके लिए है। अगर आपके परिवार में तुलसीदास जी के सुंदरकांड का पाठ होता है, तो हिंदी PDF देखना बेहतर रहेगा।
वाल्मीकि रामायण के सुन्दरकाण्ड की मुख्य घटनाएँ क्रम से नीचे दी गई हैं।
सीता माता की खोज के लिए हनुमान जी विशाल रूप धारण कर समुद्र लाँघते हैं। मार्ग में मैनाक पर्वत, सुरसा और सिंहिका जैसी बाधाएँ आती हैं, जिन्हें वे बुद्धि और बल से पार करते हैं।
हनुमान जी सूक्ष्म रूप धारण कर रात्रि में लंका में प्रवेश करते हैं। नगर की रक्षिका लंकिनी उन्हें रोकती है, पर हनुमान जी के प्रहार के बाद वह मार्ग दे देती है और लंका के पतन का संकेत देती है।
खोज करते हुए हनुमान जी एक ऐसा भवन देखते हैं जहाँ विष्णु भक्ति के चिह्न हैं। यहीं उनकी भेंट विभीषण से होती है, जो रावण के भ्राता होते हुए भी धर्मपरायण हैं।
हनुमान जी अशोक वाटिका में सीता माता को शोकाकुल अवस्था में देखते हैं। वे श्रीराम की मुद्रिका (अँगूठी) दिखाकर अपना परिचय देते हैं और उन्हें धैर्य बँधाते हैं।
हनुमान जी वाटिका के वृक्षों को उजाड़ते हैं और रावण के सैनिकों तथा पुत्र अक्षयकुमार को परास्त करते हैं। अंततः मेघनाद उन्हें बाँधकर रावण के दरबार में ले जाता है, जहाँ हनुमान जी निर्भय होकर रावण को श्रीराम की शरण लेने का परामर्श देते हैं।
रावण की आज्ञा से हनुमान जी की पूँछ में अग्नि लगाई जाती है। हनुमान जी उसी अग्नि से लंका को जलाकर, पुनः सीता माता से चूड़ामणि लेकर समुद्र पार लौट आते हैं और श्रीराम को समाचार देते हैं।
इसके बाद की कथा, अर्थात विभीषण का श्रीराम की शरण में आना और सेतु-निर्माण का आरम्भ, वाल्मीकि रामायण में युद्धकाण्ड में वर्णित है।
वाल्मीकि रामायण में सुन्दरकाण्ड के 68 सर्गों में लगभग 2,800 श्लोक हैं, इसलिए पूरा पाठ यहाँ देना संभव नहीं है — पूरा पाठ PDF में उपलब्ध है। नीचे एक सुपरिचित श्लोक दिया गया है, जो सुन्दरकाण्ड के मूल सर्गों का भाग नहीं है, बल्कि इसका पाठ आरम्भ करने से पहले हनुमान जी के आवाहन के रूप में परंपरागत रूप से बोला जाता है।
यत्र यत्र रघुनाथकीर्तनं तत्र तत्र कृतमस्तकांजलिम्।
बाष्पवारिपरिपूर्णालोचनं मारुतिं नमत राक्षसान्तकम्॥ सुन्दरकाण्ड के मूल सर्गों में से किसी विशेष श्लोक को यहाँ उद्धृत करने के बजाय, हम आपको पूर्ण एवं प्रामाणिक पाठ के लिए PDF देखने का सुझाव देते हैं, जिसमें प्रत्येक सर्ग क्रम से दिया गया है। शुद्ध उच्चारण महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए यदि संभव हो तो किसी जानकार से एक बार उच्चारण सुन लेना उपयोगी रहेगा।
संस्कृत सुन्दरकाण्ड का पाठ दीर्घ होने से इसे पूरा करने में सामान्यतः अधिक समय लगता है। कुछ भक्त इसे एक बैठक में, तो कुछ कई दिनों में सर्ग-दर-सर्ग विभाजित कर पूरा करते हैं।
स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और शांत स्थान पर आसन ग्रहण करें।
श्रीराम और हनुमान जी को प्रणाम कर पाठ का संकल्प लें।
शुद्ध उच्चारण के साथ श्लोकों का पाठ करें। समय हो तो प्रत्येक श्लोक का अर्थ भी साथ में देखें।
पाठ के अंत में आरती करें और क्षमा-प्रार्थना करें।
अनेक भक्त मंगलवार और शनिवार को यह पाठ करते हैं, क्योंकि ये दिन हनुमान जी से जुड़े माने जाते हैं। संस्कृत में अपरिचित शब्द आने पर घबराने की आवश्यकता नहीं, अभ्यास से उच्चारण सहज होता जाता है।
हाँ, इस पेज से संस्कृत सुन्दरकाण्ड की PDF मुफ़्त डाउनलोड की जा सकती है।
हाँ। यह वाल्मीकि रामायण का मूल संस्कृत सुन्दरकाण्ड है। तुलसीदास जी का अवधी में लिखा सुंदरकांड अलग ग्रंथ है, और वह हिंदी PDF पेज पर उपलब्ध है।
पढ़ सकते हैं, पर बिना अर्थ जाने केवल उच्चारण करना कठिन हो सकता है। यदि आप संस्कृत में सहज नहीं हैं, तो अर्थ सहित हिंदी संस्करण से शुरू करना आसान रहेगा।
एक बार फ़ोन या कंप्यूटर में सेव होने के बाद, यह बिना इंटरनेट के भी खुलती है।
हाँ, परिवार और मित्रों के साथ साझा कर सकते हैं। बेहतर होगा कि फ़ाइल की जगह इस पेज का लिंक भेजें, ताकि सबको सही संस्करण मिले।
यह पेज श्रद्धालुओं की जानकारी के लिए है। श्लोक और अर्थ में संस्करणों के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है।